कुछ शब्द

कुछ शब्द अपने ही थे
नुकीले से लगे बाद में
लहू निकल जाये जिसको लगे
जम गए हमेशा के लिए
काला सा एक निशान बनके

कुछ शब्द अपने ही थे
जिससे अपनोंपे ही वार किये थे
रिश्तों की नाजूक सी डोर को
खींच खींच के उलझाये थे

कुछ शब्द अपने ही थे
जिससे खुदको ही घायल पाया था
लफ़्ज़ों के इस खेल में, अब सोचते हैं
हार जाते तो बेहतर होता

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5 thoughts on “कुछ शब्द

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